शिवाजी पार्क में जब ठाकरे ब्रदर्स एक साथ एक मंच पर नजर आए तो ऐसा लगा कि शायद इस दिवाली पर दोनों परिवारों का पुनिर्मिलन निश्चित है. यह सीन न केवल राजनीतिक संदेशों से भरा था, बल्कि दशकों से चली आ रही ठाकरे परिवारों की दूरी के पिघलने का प्रतीक भी मानी जा रही है.
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