तीन घटनाएं ये बताती हैं कि हमारे देश को कमजोर करने के लिए धर्म और मीडिया का सहारा लिया जा रहा है और अगर यूक्रेन की जगह आज भारत होता तो हमारे देश को विदेशी सेना से पहले अपने ही देश के अंदर मीडिया और देश विरोधी ताकतों से लड़ना पड़ता.
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